मुंबई के स्टील कारोबारी बद्री कार चला के पहुंचे लंदन

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Badri Baldawa Mumbai to London
Source- ScoopWhoop
मैंने स्कूल में कुछ लाइन्स पढ़ी थी और आज जब भी कहीं घूमने जाता हूँ तो वही लाइन्स याद आती हैं – 
 

“सैर कर दुनिया की गाफिल ज़िंदगानी फिर कहाँ,

ज़िंदगानी गर रही तो नौजवानी फिर कहाँ”

 
पर मुंबई के रहने वाले बद्रीनाथ बलदावा ने ‘पंडित राहुल सांकृत्यायन’ की इन पंक्तियों को थोड़ा बदल दिया है| 
ना ही बद्री जी की उम्र नौजवानी वाली है और न ही उनका यह कारनामा महज़ एक यात्रा है| पर 74 वर्षीय बद्री जी की इच्छा शक्ति ऐसी है जो नौजवानो को को भी बूढ़ा अनुभव करवा दे| 
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रोड ट्रिप्स पर जाने का सबका मन   करता है और सभी जाना भी चाहते हैं, पर जो लोग ज्यादा सोचते हैं, सोचते ही रह जाते हैं और कुछ लोग कर गुज़रते हैं और अपने सपनो को पूरा करने के लिए अपनी उम्र को भी आड़े नहीं आने देते| 
ऐसा ही कुछ कारनामा कुछ अलग करने की चाह के चलते मुंबई के CA और स्टील एक्सपोर्टर बद्री बलदावा ने कर दिखाया है
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उन्होंने मुंबई से लंदन की 22,00 KM दूरी अपनी खुद की कार BMW X 5  से पूरी कर के एक अलग ही कीर्तिमान स्थापित करा है| और जैसा की भारत में माना जाता है अच्छी पत्नी वही होती है जो अपने पति के हर सपने को पूरा करने के लिए अपने पति का साथ दे, वैसे ही इस सपने को साकार करने में बद्री जी की पत्नी ने उनका पूरा पूरा साथ दिया और यह यात्रा बद्री जी ने अपनी  पत्नी और 10 साल की पोती के साथ पूरी करी|
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जैसे की हमने इस आर्टिकल के शुरुआत में लिखा है की सपनो के आड़े उम्र नहीं आनी चाहिए वैसे ही बद्री जी ने भी अपने सपने के आड़े अपनी उम्र को नहीं आने दिया| बद्री जी की उम्र करीबन 74 साल और उनकी पत्नी पुष्प की उम्र करीबन 63 वर्ष है| 
 
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बद्री जी और उनकी पत्नी अपनी इस यात्रा के दौरान 19 देशों से गुज़रे और लगभग 22,000 किलोमीटर गाडी चलायी और पूरे सफर के दौरान उनकी 10 साल की पोती ने भी उनका पूरा पूरा साथ दिया और अपने दादा और दादी का हौसला बढ़ाया| 
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इस ट्रिप के लिए प्लानिंग बद्री जी ने करीबन एक साल पहले ही कर ली थी और इस काम में उनके दोस्तों ने भी उनकी काफी मदद करी| सभी चीज़ों को प्लान करने के लिए बद्री जी को अपने दोस्तों की जरूरत थी जिसे उनके दोस्तों ने बखूबी अंजाम दिया| 
 
 
 
उन्होंने अपनी इस यात्रा की शुरुआत इसी साल 23 मार्च को शुरू करी और इम्फाल से म्यांमार से होते हुए चीन, थाईलैंड और रूस होते हुए लंदन तक का सफर तय करा. उन्होंने ‘द हिन्दू’ से बातचीत के दौरान बताया की उनके पास रास्ते को लेकर ज्यादा विकल्प उपलब्ध नहीं थे| अगर वह इस रूट से नहीं जाते तो उन्हें अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए जाना पड़ता जहाँ उन्हें काफी परेशानियों का सामना करता पड़ता क्यूंकि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते इस समय मधुर नहीं हैं और ऐसे में उन्हें उस रुट पर परेशानी उठानी पड़ती और शायद ज़िंदा रहते हुए पूरा करना भी मुश्किल होता|  इस रुट के अलावा दूसरा विकल्प उनके पास चीन के रास्ते होकर जाने का था लेकिन चीन से भी इस मामले में अनुमति मिलना काफी मुश्किल था इस कारन उन्होंने म्यांमार, थाईलैंड और रूस वाला रुट चुना|
 
 बद्री बलदेव इस तरह की यात्राएं पूर्व में कर चुके हैं और करीबन 30 साल पहले भी वह मुंबई से बद्रीनाथ तक की यात्रा इसी तरह कार से पूरी कर चुके हैं| 
 
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डिजिटल युवा उनकी इस अनोखी यात्रा के अच्छे से पूरा होने के लिए उन्हें बधाई देते हैं और उनके और उनकी पत्नी के अच्छे स्वास्थय की प्रार्थना करते हैं की वह आगे भी ऐसी जटिल यात्राएं अच्छे से पूरी करते रहे| 
“डिजिटल युवा परिवार की और से उन्हें हार्दिक बधाई”
साभार – द हिन्दू

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