यदि आप भी हैं मुँह के छालो से परेशान तो बरतें ये सावधानियां…

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sore health tips
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शरीर में गर्मी ज्यादा होने पर अक्सर मुंह के भीतर, जीभ, होठों व भीतरी गालों पर छाले हो जाते हैं। छालों का कष्ट इतना ज्यादा हो जाता है कि कुछ खाने पीने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता हैं |

प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार उपवास तथा नाभि पर तेल लगाना छालों का सबसे उत्तम उपाय है, लेकिन अधिकतर लोग प्राकृतिक उपाय पर विश्वास नहीं करते | छालों से जल्दी छुटकारा पाने के चक्कर में छालों से पीड़ित रोगी धैर्य छोड़कर डॉक्टर के पास भागते हैं। परन्तु आश्चर्यजनक बात यह है कि केवल कुछ एक प्रकार के छालों को छोड़कर शेष सभी छालों का उपचार शरीर खुद ही करता है।

अधिकतर चिकित्सक छालों का कारण पेट की खराबी मानते हैं परन्तु होम्योपैथी में विष दोष को छालों का कारण माना जाता है। विभिन्न पाचक रस, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आदि मिलकर लार का निर्माण करते हैं जो पाचक क्रिया को सक्रिय करती है। जब तक लार ठीक बनती रहती है तब तक पेट खराब होने की कोई वजह नहीं होती। लेकिन किसी कारणवश यदि मुँह में लार बनने में अनियमितता उत्पन्न हो तो पेट खराब होने की स्थिति आ सकती है।

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muh ke chhale

छाले कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे−
प्रलीम− इस प्रकार के छालों में होठों के कोनों पर छाले हो जाते हैं तथा होठ भी कुछ मोटे हो जाते हैं। इस प्रकार छाले एक प्रकार का संक्रामक रोग है जिसकी अवधि 14 से 21 दिन हो सकती है। इसका मुख्य कारण सफाई न रखना तथा ऋतु के विरुद्ध भोजन की प्रवृत्ति है। इसका सबसे अच्छा उपचार सफाई है।

चिलाइटिस− इस प्रकार के छाले प्रायः निचले होठ पर होते है। इसमें एक छोटे बीज की तरह नुकीले छाले खड़े हो जाते हैं जिनमें बहुत कष्ट होता है। सोते समय इन छालों पर पपड़ी जम जाती है। इस प्रकार के छाले स्वयं ही 8−10 में छाले हो जाते हैं।

फोर्डिस− ये सफेद अथवा पीले द्रव्य वाले छाले होते हैं जो होठों के ऊपरी तथा निचले हिस्से पर होते हैं। इस प्रकार के छाले केवल व्यस्कों को होते है। छालों की संख्या बढ़ते हुए होठों से आखिरी दाढ़ तक पहुंच जाती है। लगभग सात दिनों में यह रोग स्वयं ठीक हो जाता है।

पलेक− इस प्रकार के छाले जीभ के ऊपरी सिरे, मध्य भाग और किनारों पर सुई की नोंक के आकार के छोटे−छोटे छाले हो जाते हैं। ये लाल होते हैं कभी−कभी इनका आकार बढ़ कर आधा इंच तक लंबा हो सकता है। इन छालों में द्रव्य हो भी सकता है और नहीं भी। 10−15 दिन में ये छाले पहले जीभ के मध्य से तथा किनारों से स्वयं ही ठीक हो जाते हैं।

ज्यादातर छाले खुद ही ठीक हो जाते हैं। छालों से बचने का सबसे अच्छा तथा सरल उपाय है उचित आहार तथा पूरे शरीर के साथ−साथ मुंह के अंदर की सफाई। नहाने के बाद नाभि पर तेल लगाना भी फायदेमंद होता है।

खानपान में परहेज भी छालों से राहत दिलाता है। ज्यादा मिर्च−मसाले, चाय−काफी तथा तीक्ष्ण प्रकृति वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए। कुछ खाद्य पदार्थों की प्रकृति विपरीत होती है इसलिए उनका प्रयोग साथ−साथ न करें, जैसे दही−तेल, दूध−मछली, तरबूज−पानी आदि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। हींग, कच्चा प्याज तथा लहसुन से परहेज करें। दही का प्रयोग छालों में भी विशेष लाभ देता है। धूम्रपान करने वालों को इस पर लगाम लगानी चाहिए। यदि छाले निश्चित अवधि में ठीक न हों तो डॉक्टर से परामर्श लें तथा साथ ही अपने आहार पर भी नियंत्रण रखें।

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