रक्षा बंधन पर पड़ रहा है चंद्र ग्रहण, इन राशियों पर पड़ेगा असर, करे ये उपाय

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Chandra_Grahan
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12 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। इससे पहले साल 2005 में ऐसा संयोग बना था।

रक्षा बंधन 7 अगस्त को मनाया जाएगा। इस बार रक्षा बंधन के दिन भद्रकाल और चंद्रग्रहण भी है। इसके साथ ही उस दिन श्रावण मास का आखिरी सोमवार भी है। 12 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। इससे पहले साल 2005 में ऐसा संयोग बना था। इस दिन कुछ राशियों के लिए धन लाभ के योग बन रहे हैं, तो वहीं कुछ राशियों के लिए ये दिन अनुचित रहेगा। मेष, मीन, सिंह, मकर और कुंभ राशि वालों के लिए धन लाभ का योग है तो धनु, तुला, मिथुन, वृश्चिक, कर्क राशि वालों के लिए यह चंद्र ग्रहण सही साबित होता नहीं दिख रहा है। इन राशि वालों को कुछ दिन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है और कई बनते काम रुक सकते हैं। चंद्र ग्रहण के असर से बचने के लिए कई सारे उपाय हैं। नीचे दिए गए वीडियो में इस बारे में जानकारी दी गई है।

चंद्र ग्रहण के दिन बुजुर्ग, रोगी और बच्चों को छोड़कर बाकी सदस्य भोजन ना करें। गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण के दिन घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि इस दिन वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा होता है। घर में ही रहकर मंत्रोचारण करना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार का शुभ कार्य ना करें। मन में बुरे विचारों को ना पनपने दें। इस दिन ब्रह्मचार्य का पालन करें। अपने देवता का ध्यान लगाएं। जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है, वे ग्रहण के दिन शनि मंत्र का जाप करें। जिन जातकों की कुंडली में मांगलिक दोष है, वे चंदर ग्रहण के दिन सुंदरकांड का पाठ करें।

वीडियो मे देखे उपाय….

इस दिन आटा, चीनी, सफेद और काले वस्त्र, साबुन, उड़द की दाल, काला तिल जरूरतमंदों को दान करें। इसके अलावा नवग्रह मंत्र, गायत्री एवं माहमृत्युंजय मंत्र जाप करें और दुर्गा चालीसा, विष्णु सहस्त्रनाम, श्रीमदभागवत गीता, गजेंद्र मोक्ष का पाठ भी कर सकते हैं। इसके साथ ही ग्रहण के समय चंद्रदेव की पूजा करने से भी शुभ फल मिलता है। इस दिन के लिए दो मंत्र भी हैं, जिनका जाप करना शुभ माना जाता है। पहला मंत्र है, ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:’ और दूसरा मंत्र है ‘ॐ सों सोमाय नम:’। इन दोनों में से किसी एक मंत्र का जाप किया जा सकता है।

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