जब किशोर कुमार एक सीन में देव आनंद को गाली देकर भाग गए थे

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Kishor Kumar
Kishor Kumar

फिल्म इंडस्ट्री एक आकाशगंगा है. जहां कई सितारे आते हैं चमकते हैं और फिर ख़त्म हो जाते हैं. लेकिन उनमें कुछ सितारे ऐसे भी होते हैं जो हमेशा चमकते रहते हैं. जैसे शुक्र. किशोर कुमार बॉलीवुड के वही शुक्र हैं. 4 अगस्त 1929 को आभास कुमार गांगुली के नाम से पैदा हुए किशोर कुमार का नाम सुनते ही हम कंफ्यूज़ हो जाते हैं कि उन्हें किस रूप में याद किया जाए. वो एक्टर, सिंगर, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, म्यूज़िक डायरेक्टर, लिरिसिस्ट और सबसे बढ़कर एक कमाल के इंसान थे. तो कंफ्यूज़न लाज़मी है. उनकी ज़िंदगी बड़ी मज़ेदार थी. इतना सबको पता है. लेकिन उनके दुःख भी कम नहीं थे. वही दुःख जिसे वो पूरी दुनिया से छुपा कर रखते थे, एक हंसमुख मुखौटे के भीतर. मध्य प्रदेश में खंडवा में जन्मे किशोर कुमार को अपनी जन्मस्थली से बहुत लगाव था और ये बात उनके आस-पास मौजूद सभी लोगों को पता थी. इसलिए बंबई में वो बहुत अकेला महसूस करते थे. उनके कोई दोस्त भी नहीं थे.

पूरी दुनिया उन्हें पागल कहती थी

किसी इंटरव्यू के दौरान एक जर्नलिस्ट ने उनसे पूछा कि आप किसी भी पार्टी में नहीं जाते, ना ही आपके बंगले पर कोई आता है. तो आपको अकेला महसूस नहीं होता? इस पर किशोर कुमार ने जो जवाब दिया उसके लिए उन्हें पागल कहा जाने लगा. किशोर कुमार ने कहा,

‘नहीं, मुझे बिलकुल अकेला नहीं लगता. मैंने अपने घर में लगे इन पेड़-पौधों से दोस्ती कर ली है. 
उनके नाम रखे हैं. मैं इनसे ही बातें करता हूं.’

उनके इस जवाब पर उस मैगज़ीन ने उन्हें ‘मैड मैन’ करार दिया. जिसके जवाब में कशोर कुमार की कही बात आज भी कई लोग दोहराते हैं. किशोर ने कहा ‘दुनिया कहती है मैं पागल और मैं कहता हूं दुनिया पागल’. इसी कथ्य के साथ उन्होंने अपने जीवन का फलसफा लोगों के सामने रख दिया.

फिल्मफेयर मैगज़ीन के कवर पर किशो कुमार.(फ़ोटो: ओल्ड इंडियन फोटोज़)

बचपन में बहुत बेसुरे थे किशोर कुमार

किशोर कुमार के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने गाने की कभी कोई ट्रेनिंग नहीं ली. बावजूद इसके वो लंबे समय तक बॉलीवुड के टॉप सिंगर बने रहे. इसके बारे में उनके बड़े भाई अशोक कुमार बताते हैं कि बचपन में किशोर की आवाज़ बिलकुल फटे बांस जैसी थी लेकिन एक बार उनका पांव सब्ज़ी काटने वाली दराती पर पड़ गया था. पैर में गहरा ज़ख्म हो गया. इलाज में डॉक्टर ने न जाने कैसी दवा दे दी कि किशोर कुमार 2-3 दिन तक रोते ही रह गए. बस उन दिनों के रोने में ही उनका गला साफ हो गया.

एक फिल्म के सीन में तीनों कुमार भाई.(फ़ोटो:रीडिफ़)

किशोर दा कभी एक्टिंग नहीं करना चाहते थे

# किशोर कुमार कभी एक्टिंग नहीं करना चाहते थे. वो कुंदन लाल सहगल के फैन थे और उनकी ही तरह गाना चाहते थे. लेकिन उनके बड़े भाई अशोक कुमार, जो तब तक बॉलीवुड में बड़ा नाम बन चुके थे, ने उनसे थोड़ी-बहुत एक्टिंग भी करने को कहा. लेकिन किशोर इसके बारे में बिलकुल भी सीरियस नहीं थे. इसलिए उन्हें जब भी अशोक कुमार के कहे जाने पर किसी फिल्म में लिया जाता तो वो कोई पैंतरा बना कर एक्टिंग करने से बच जाते थे. एक बार किशोर कुमार को अपने भाई अशोक कुमार के साथ फिल्म ‘भाई-भाई’ के लिए सीन शूट करना था. किशोर ने फिर से अपना खेल शुरू कर दिया. लेकिन इस दफा उनके भाई अशोक कुमार उनके सामने थे, तो उनकी दाल नहीं गल पा रही थी. तब उन्होंने डायलॉग भूल जाने का नाटक किया और सीन से बाहर भागने लगे. पर अशोक कुमार भी अशोक कुमार थे, उन्होंने किशोर कुमार के दोनों पैरों पर अपना पैर रख दिया और उन्हें हिलने का भी मौका नहीं दिया. तब जाकर कहीं ये सीन शूट हो सका.

फिल्म ‘भाई-भाई’ का वो सीन. (फ़ोटो:यूट्यूब)

# एक्टिंग से बचने के तो उनके ढेरों किस्से हैं लेकिन ये वाला सबसे ख़ास है क्योंकि ये देवानंद के साथ हुआ था. एक फिल्म में अशोक कुमार और देवानंद साथ काम कर रहे थे. उस फिल्म के एक सीन के लिए कोई एक्टर चाहिए था तो अशोक कुमार ने किशोर से कहा कि एक सीन है, कर दे. अशोक कुमार ने उन्हें ब्रीफ देते हुए कहा की जैसे देव अन्दर आएगा तुझे उसे खरी-खोटी सुनानी है. किशोर ने हां में सर हिला दिया. लेकिन जैसे ही सीन शुरू हुआ और देवानंद अंदर आए किशोर कुमार ने उन्हें सच में गंदी गाली दे दी और भाग गए. डायरेक्टर प्रोड्यूसर सब चिल्लाते रहे कि सीन अभी पूरा नहीं हुआ है. लेकिन किशोर कुमार तो बस भाग ही गए.

किशोर कुमार के साथ देवानंद.(फ़ोटो:हमाराफोटोज़)

बुरे वक़्त में किसी ने साथ नहीं दिया

किशोर कुमार यूं तो बड़े खुशमिज़ाज आदमी थे. लेकिन वो उन लोगों से बड़े खफा रहते थे जिन्होंने उन्हें शुरूआती दिनों में काम मांगने पर झिड़क दिया था. किशोर जब बंबई आए तो उन्हें सब लोग बड़े नाकारा और आवारा समझते थे. उन्हें लगता कि इसका बड़ा भाई एक्टर है तो ये भी चला आया पीछे-पीछे. उन्हें कई लोगों ने वापस खंडवा लौट जाने की भी सलाह दी और काम देने से भी इंकार कर दिया. ये बातें किशोर कुमार के दिल में आखिर तक बैठी रही. किशोर कुमार को लगता था कि ये लोग उनसे सिर्फ दौलत और शोहरत के लिए मिलते हैं. जब उनके पास ये सब नहीं होगा तो फिर से ये वैसा ही तल्खी भरा बर्ताव करने लगेंगे. और दुर्भाग्यवश उनकी ये बात सही भी निकली.

एक दौर के बाद जब किशोर कुमार ने काम करना बंद कर दिया और उनका कुछ इनकम टैक्स बकाया रह गया. इसे भरने के लिए उन्हें स्टेज शो करने पड़ रहे थे. उस दौर में उन्हें किसी ने कोई काम नहीं दिया. ना ही एक्टिंग में , ना ही गाने के लिए. उस दौर में उनकी मदद को आगे आए एस.डी. बर्मन. किशोर कुमार और एस.डी. बर्मन की जोड़ी को लोग खासा पसंद करते थे. तो बर्मन ने किशोर से कहा कि चलो एक छोटा प्रोजेक्ट है, साथ में करते हैं. उस फिल्म से एक नए लड़के को लांच किया जा रहा था. उस फिल्म के लिए सभी गाने किशोर कुमार की आवाज़ में रिकॉर्ड किए गए और एल्बम सुपर-डुपर हिट हुआ. वो फिल्म थी ‘आराधना’. उस फिल्म के बाद राजेश खन्ना के रूप में बॉलीवुड को अपना पहला सुपरस्टार मिला. उसके बाद किशोर के पास ऑफर का तांता लग गया.

एस.डी. बर्मन के साथ किशोर कुमार.(फ़ोटो:रीडिफ़)

‘आनंद’ फिल्म के लिए पहली पसंद राजेश खन्ना नहीं किशोर कुमार थे

राजेश खन्ना की फिल्म आनंद के लिए डायरेक्टर ऋषिकेश मुख़र्जी की पहली पसंद किशोर कुमार ही थे. लेकिन एक गलतफहमी की वजह से किशोर दा के हाथ से वो फिल्म निकल गई. हुआ यूं कि किशोर कुमार का किसी बंगाली डायरेक्टर के साथ झगड़ा हो गया था तो उन्होंने अपने गार्ड से कहा कि अगर कोई बंगाली उनके घर आए तो उसे डांट के भगा देना. उसी दिन ऋषिकेश मुख़र्जी किशोर कुमार से मिलने पहुंचे और किशोर दा के गार्ड ने उन्हें भला-बुरा कहकर भगा दिया. इस बात से ऋषिकेश मुख़र्जी बेहद नाराज़ हुए और उन्होंने किशोर कुमार को अपनी फिल्म में लेने का विचार छोड़ राजेश खन्ना को साइन कर लिया.

फिल्म ‘आनंद’ के सेट पर राजेश खन्ना और अमिताभ के साथ ऋषिकेश मुख़र्जी.(फ़ोटो:फिल्मअवार्ड्स)

अमिताभ की फिल्म किशोर कुमार की ज़िंदगी पर बनी थी

किशोर कुमार की पहली शादी रोमा गुहा से हो चुकी थी और उनसे उन्हें एक बेटा भी था. लेकिन ये शादी ज़्यादा दिनों तक नहीं चल सकी. इसके पीछे की वजह बताई जाती है कि रोमा सिंगर बनना चाहती थीं लेकिन किशोर उन्हें घर संभालने को कहते थे. इसी बात पर दोनों की तनातनी हो गई और रोमा घर छोड़ कर चली गईं. कहा ये भी जाता है कि अमिताभ-जया स्टारर फिल्म ‘अभिमान’ में इन दोनों की ही कहानी दिखाई गई थी.

अमिताभ बच्चन के साथ किशोर कुमार.(फ़ोटो:रीडिफ़)

मधुबाला के दिल में छेद था इसके बावजूद उनसे शादी की

रोमा से अलग होने के बाद किशोर कुमार ने एक फिल्म साइन की ‘चलती का नाम गाड़ी’. इस फिल्म में तीनों कुमार भाइयों के साथ मधुबाला थीं. फिल्म के सेट पर ही किशोर कुमार और मधुबाला की दोस्ती हो गई जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. मधुबाला के दिल में छेद था और ये बात किशोर कुमार को पता थी. बावजूद इसके वो मधुबाला से इश्क़ कर चुके थे और उनसे शादी करने वाले थे. लेकिन वो शादी से पहले मधुबाला का इलाज करवा देना चाहते थे. लोगों ने भी यही सलाह दी. लेकिन मधुबाला चाहती थीं कि पहले शादी हो जाए फिर इलाज हो. किशोर कुमार को जैसे ही ये बात पता चली उन्होंने मधुबाला से शादी कर ली और उसके बाद उनके इलाज के लिए लंदन चले गए. लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी मधुबाला नहीं बचीं और किशोर कुमार फिर से अकेले हो गए.

मधुबाला के साथ किशोर कुमार.(फ़ोटो:बॉलीवुड बबल)

 

अशोक कुमार के जन्मदिन पर हुआ किशोर कुमार का निधन

किशोर कुमार ने अपने बड़े भाई अशोक कुमार के 76वें जन्मदिन पर एक भव्य पार्टी प्लैन की थी. पूरी बॉलीवुड को न्योता भेजा गया था. किशोर कुमार का बेटा अमित भी लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी करके आ रहा था. मतलब पूरा जश्न वाला माहौल था. तैयारियां ज़ोरों-शोरों से चल रहीं थी. लेकिन किसे पता था कि जो बॉलीवुड अशोक कुमार के जन्मदिन की तैयारी पर शरीक होने वाला था उसी दिन उसे किशोर कुमार की मैयत में शरीक होना पड़ेगा. 13 अक्टूबर 1987 को शाम 04:45 पर किशोर कुमार को अपने निवास गौरी कुंज पर दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया. ये सच में बॉलीवुड के लिए बहुत बड़ा झटका था. किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था. लेकिन होनी को कौन टाल पाया है. किशोर कुमार की इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार उनके गांव खंडवा में ही किया जाए. वैसा ही हुआ. आज मध्य प्रदश के खंडवा में उनकी समाधी है और राज्य सरकार हर साल किशोर कुमार के नाम पर कला के उत्कृष्ट लोगों को ये सम्मान देती है.

             यह स्टोरी दी लल्लनटॉप के लिए 'श्वेतांक शेखर' ने लिखी है

दी लल्लनटॉप से साभार

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