‘जॉली LLB 2’ के एक्टर की मौत हो गई

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आखिरकार उस एक्टर ने मौत के आगे सरेंडर कर ही दिया, जिसने अपनी मुफलिसी से तंग आकर फेसबुक तक पर मदद मांग ली थी. वहां से उन्हें कोई मदद हासिल हुई या नहीं पता नहीं, लेकिन अब उनकी डेथ हो गई है. सीताराम पांचाल को तीन साल से कैंसर था. अपनी मौत के वक़्त उनकी उम्र 54 साल थी. गुरुवार की सुबह अचानक उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई.

वो ‘पान सिंह तोमर’, ‘बैंडिट क्वीन’, ‘सारे जहां से महंगा’, ‘पीपली लाइव’, ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ जैसी कई हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं.

कुछ दिन पहले फेसबुक पर उनकी जो तस्वीरें पोस्ट हुई थी, उन्हें देख कर कलेजा हिल जाता था.

अपनी पत्नी के साथ सीताराम पांचाल.

उन्होंने फेसबुक और वॉट्सएप पर दोस्तों और प्रशंसकों को एक मार्मिक मैसेज लिखा था,

“भाइयों, मेरी हेल्प करो. मेरी कैंसर से हालत खराब होती जा रही है. मैं आपका कलाकार भाई, सीताराम पांचाल.”

सीताराम पांचाल को पिछले तीन सालों से किडनी और लंग्स कैंसर था. इन तीन सालों में उनके कई साथियों ने, सह-कलाकारों ने उनकी मदद की. इनमें इरफान खान, पांचाल के एनएसडी बैचमेट संजय मिश्रा, रोहिताश गौड़, टीवी प्रोड्यूसर (एक घऱ बनाऊंगा) राकेश पासवान जैसे नाम शामिल हैं. फेसबुक पर की गई उनकी अपील के बाद भी काफी हाथ उनकी मदद के लिए आगे आए थे. लेकिन उन जैसे कलाकार पर हाथ फैलाने की नौबत आए ये चीज़ अपने आप में गुस्सा दिलाने वाली है.

सीताराम पांचाल कैथल जिले के डूंडर हेड़ी गांव में 1963 में पैदा हुए. उन्होंने हरियाणवी फिल्म ‘लाडो’ के अलावा छन्नो में भी काम किया. एक्टिंग छुटपन में स्कूल में ही शूरू कर दी थी. ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में उनका सलेक्शन हो गया. उसके बाद से वो हिंदी फिल्मों में अलग अलग चरित्र भूमिकाओं में दिखते रहे थे.

फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ में इरफान ख़ान के साथ.

हमारी फिल्म इंडस्ट्री का ये चलन हमेशा से रहा है कि चंद लीड एक्टर्स को छोड़ कर बाकियों की कोई पूछ नहीं होती. उन्हें उनके किरदार भर सराहा जाता है. और बाद में सिरे से भुला दिया जाता है. जबकि कोई भी फिल्म हर छोटे-बड़े एक्टर की मेहनत का नतीजा होती है. सीताराम पांचाल जैसे अभिनेता किसी फिल्म को समग्रता प्रदान करते हैं. लेकिन अक्सर इनकी जिंदगानियां मुफलिसी के साए में ही गुज़रती है.

अभिनय का पेशा कोई नौकरी तो है नहीं, जिसमें पेंशन की व्यवस्था हो. और बॉलीवुड सारा पैसा तो मेन स्टार को ही दे देता है. छोटे एक्टर्स के पल्ले तो मजदूरी भर आती है. उसमें वो बीमारियों और बुढ़ापे का इंतज़ाम करे भी तो कैसे? मजबूरन सीताराम पांचाल जैसे लोगों को पब्लिक अपील करनी पड़ती है. ये सूरतेहाल दुखद है. मुंबई की झुग्गियों में ऐसे एक्टर्स की भीड़ मिल जाएगी जिन्होंने यादगार रोल किए.

अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में.

काश इन कलाकारों के वेलफेयर के लिए भी कोई संस्था बने. कोई ये सुनिश्चित करे कि लोगों को अपने अभिनय से खुशियों के पल देने वाले इन कलाकारों की जिंदगियों से ख़ुशी गायब न हो जाए. अगर सीताराम पांचाल जी की मौत ऐसी किसी पहल की राह खोलती है, तो ये उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

साभार – दी लल्लनटॉप

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