गलती से भी न डाउनलोड करना Sarahah, कर दो डिलीट !

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सराहा फेसबुक, ट्विटर पर गदर काटे है. बहुत बड़े बड़े सिलबिट्टी इसकी चरस सूंघ लिए हैं. लेकिन सराहा की दुनिया भी नॉर्मल दुनिया की तरह ही है. वहां उसी को भाव मिलता है जिसे कुछ लोग जानते हों. नहीं तो लोग एक मैसेज को तरस जाते हैं. वो मुंह फैलाए निहारा करते हैं कि कोई एक गाली ही लिखकर भेज दे.

लेकिन कुछ सवाल हैं. सराहा में नया क्या है? ये पहले से मौजूद तमाम ऐप्स से अलग कैसे है? और सबसे बड़ा सवाल, क्या हम इसके लिए तैयार हैं? मतलब इसके साथ जुड़े जो रिस्क हैं उनको देखते हुए? इन सब सवालों को थोड़ा धीरज से, तसल्ली से समझने की कोशिश करते हैं.

नया क्या है?

सराहा का मतलब है ‘ईमानदारी,’ ये भारी खोज के बाद पता चला है. लेकिन ईमानदारी से इसका लेना देना कुछ नहीं है. आदमी को हमेशा शिकायत अपनी पीठ पीछे बुराई करने वालों से होती है. और उसे करने के लिए किसी सराहा की जरूरत नहीं है. फ़ेक आईडी बनाकर फेसबुक पर लोग रोज गालियां देते हैं. ट्विटर पर ट्रोल करते हैं. बस इसमें नया ये है कि ट्रोलिंग और बुराई के अलावा कुछ अच्छा अच्छा बोलने वाले लोग भी निकल आएंगे. आपको पता चलेगा कि कौन सीक्रेटली आपको प्यार करता है, कौन प्रपोज करना चाहता है, कौन शादी करना चाहता है, कौन सेक्स करना चाहता है, कौन केवल किस करना चाहता है. ये काम लोग फ़ेक आईडी से नहीं करते. बस इत्ता ही नया है. लेकिन इस ऐप के आने के बाद सारी एंजेल प्रिया अपना ठिकाना बदल चुकी हैं. लड़के अपने सहकर्मियों, दोस्तों की मौज लेने के लिए उनको पसंद आने वाले मैसेज भेज रहे हैं.

ऐप्स से अलग कैसे है?

बस इत्ता ही अलग है कि सऊदी अरब में बना है. वहां हर चीज परदे में रहती है. इसी को वो लोग पाकीजगी और ईमानदारी कहते हैं. लेकिन हमारे देश में इस ऐप को लेकर ठेंगे बराबर भी ईमानदारी नहीं है. इसको व्हाट्सऐप, ट्विटर और फेसबुक की ही तरह झमक के इस्तेमाल किया जा रहा है. मने वहां भी वही बकैती, सराहा पर भी वही बकैती. जो मैसेज लोग इनबॉक्स में करते हैं वही सराहा पर. फिर उम्मीद करते हैं कि बंदा या बंदी उसका नाम गेस करे. फिर इनबॉक्स में मैसेज करके पूछते हैं “तूने मेरा वाला मैसेज क्यों पोस्ट नहीं किया? मैंने ही तो वो लिखा था कि आपकी आंखें बड़ी खूबसूरत हैं.” इसमें घंटा ईमानदारी है और ये कैसे अलग है?

क्या हम तैयार हैं?

देखो हम तैयार तो कभी किसी चीज के लिए नहीं होते. देश डिमोनिटाइजेशन के लिए तैयार नहीं था. दिल्ली ऑड ईवन के लिए तैयार नहीं थी. दुनिया ट्रंप के लिए तैयार नहीं थी. कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि सन 47 में देश आजादी के लिए तैयार नहीं था. अंग्रेजों को कुछ दिन और रहना था. लेकिन ये सब कुछ हो गया तो सराहा कौन सी बड़ी चीज है. बड़ी चीज है. क्योंकि हम लोग हर चीज को बिना उसके साइड इफेक्ट जाने धुंआधार इस्तेमाल करने वालों में से हैं. मतलब चाऊमीन तब तक रेगुलर खाएंगे जब तक पेट में इतनी तेज दर्द न शुरू हो जाए कि अस्पताल में एडमिट होना पड़े. वही सराहा के साथ भी हुआ है. जो अभी इसमें घुसे हैं उनका नहीं पता, लेकिन दो दिन पुराने लोग सब कुछ जान गए हैं कि किसने किसको क्या मैसेज किया. तो इसमें कोई खास रोमांच नहीं रह गया है.

शायद आपको पता न हो. इस ऐप के दो बड़े रिस्क हैं.

1. अगर डेटा लीक हो गया- बहुत साल पहले की बात है. साल 2002 था. कनाडा में एक ऐश्ले मैडिसन नाम की डेटिंग साइट लॉन्च हुई थी. सब शादीशुदा लोग इस पर अफेयर कर सकते थे. 2015 में इस पर संकट आ गया. हैकर गैंग ने अपना कमाल दिखाया. यूजर्स को धमकाने लगे कि हमने तुम्हारा डेटा उड़ा लिया है. हमको बिट कॉइन में इत्ती रकम दो नहीं तो नंगा नाच कर देंगे. साइट बनाने वालों को धमकी मिली कि तुरंत बंद करो नहीं तो डेटा लीक कर देंगे. भूचाल आ गया था. सराहा पर भी मैसेज कर रहे हो तो होशियार रहना. गिरगिट के कलर और इंसान की नीयत का कोई भरोसा नहीं होता कि कब बदल जाए.

2. अगर डिप्रेशन हो गया- आपको लगता है कि आपके पास दनादन मैसेज आ रहे हैं, वो भी सारे अच्छे अच्छे तो दुनिया बहुत अच्छी है. तुम्हारी कसम खाकर बता रहे हैं, दुनिया बहुत कमीनी है भाई. यहां अगर किसी की विचारधारा किसी को नहीं पसंद है तो वो उसको तोड़ने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है. अगर सराहा पर मैसेज करके किसी ने आपको लगातार गालियां देनी शुरू कर दीं तो आप थोड़ी देर इग्नोर करोगे. फिर ब्लॉक कर दोगे. लेकिन इंसानी दिमाग पर तारीफ उतना असर नहीं डालती जितना एक हेट मैसेज डालता है. अगर चार लोगों ने तुमको कह दिया कि शक्ल अच्छी नहीं है या लिखने में अच्छे नहीं हो, तो आपका कॉन्फिडेंस जा सकता है. इसका रिस्क लेने को तैयार हो तो बढ़िया है. जम के इस्तेमाल करो. हमारे यहां निखिल बेबी को एंजाइटी हो जाती है. ऐसे बकचोन्हरों से. इसीलिए वो इस सबसे दूर है.

कुल मिलाकर हल्के हल्के इस्तेमाल करना तो ठीक लग रहा है लेकिन सारा काम धंधा छोड़कर इसी में लग गए तो धंधा छूट जाएगा.

साभार – दी लल्लनटॉप

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