जानिए कैसे ये शहर भारत की आज़ादी से 5 साल पहले ही आज़ाद हो गया था

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आज पूरा भारत आज़ादी दिवस मना रहा है। भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आज़ादी मिली थी। पर क्या आप जानते है कि एक शहर आज़ादी से 5 साल पहले ही आज़ाद हो गया था। इस गांव का नाम है इसरो, जो कर्नाटक में है। 1942 में इस गांव ने अपने आप को ब्रिटिश शासन से आज़ाद घोषित कर दिया था।

कर्नाटक के शिमोगा ज़िले में पड़ने वाले इसरो के लिए 12 अगस्त 1942 का दिन ऐतहासिक बन गया। इस गांव के रहने वाले 111 साल के चुरैय्या बताते है कि 12 अगस्त को भरी दोपहर में गांव के बाजार में लोग भारी संख्या में खड़े हो गए। सब ने लगान देने साफ़ इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास देने के लिए कुछ भी नहीं है और वो पूर्ण आजादी की मांग करते है। सबको दर था कि इतने पर ब्रिटिश फौजी उनकी डंडों से मारपीट करेंगे पर ऐसा कुछ नहीं हुआ और अंग्रेजों ने लोगों की मांगों के बारे में पुछा।

इस विरोध के बाद लोगों का हौंसला बहुत ज्यादा बढ़ गया। अब गाँव वालों ने ब्रिटिश फ़ौज की हर चीज़ का विरोध करना शुरू कर दिया। 29 सितम्बर 1942 को आखिरकार वो दिन भी आ गया जब लोगों ने ब्रिटिश फौजियों को गाँव में घुसने से ही रोक दिया और वीरभररेश्वर मंदिर के ऊपर तिरंगा झंडा लहरा दिया। इसी दिन इसरो को ब्रिटिश शासन से आज़ाद घोषित कर दिया गया।

हालांकि कुछ दिन बाद ब्रिटिश सरकार ने बड़ी गिनती में पुलिस को इस गाँव में भेजा। पुलिस और गाँव वालों के बीच टकराव शुरू हुआ। जिसमे लोगों ने एक रेवेनुए अफसर और एक पुलिस अधिकारी का कतल कर दिया। इसके बाद गाँव के तकरीबन 50 स्वतंत्रता सैलानी जंगल में भाग गये लेकिन जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इनमें से 5 स्वतंत्रता सैलानी 10 मार्च 1943 को शहीद हो गए। इसके बाद आन्दोलन और तेज़ हो गया।

कई औरतों, बच्चों ने आजादी के लिए अगले पांच सालों में अपनी जान कुर्बान की। आखिरकार 5 साल के आजादी संघर्ष के बाद 1947 को बाकी भारत के साथ इस गाँव को भी पूर्ण आजादी मिली लेकिन इस गाँव ने 5 साल पहले ही आजादी का स्वाद चख लिया था।

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