आर. डी. बर्मन साहब हिंदी फिल्म जगत में संगीत की दुनिया की सबसे मशहूर हस्ती थे और आज भी हैं

0
241
pancham-da

27 जून 1939 को मशहूर संगीतकार सचिन देव बर्मन व मीरा के यहाँ जन्मे, आर. डी. बर्मन साहब हिंदी फिल्म जगत में संगीत की दुनिया की सबसे मशहूर हस्ती थे और आज भी हैं। आज भी उनके संगीत से प्रभावित होकर कई संगीतकार अपना संगीत बनाते हैं। राहुल देव बर्मन साहब अद्वितीय सांगीतिक प्रतिभा के धनी थे और उनकी इस प्रतिभा के कारण आज भी उन्हें विश्व के सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों में एक माना जाता है। बर्मन साहब को फिल्म जगत में पंचम दा के नाम से जाना जाता है।

पंचम दा कौन थे, क्या थे, उनका संगीत क्या था, उनकी संगीत शैली कैसी थी? यह सब जानने के लिए हम क्या करेंगे? किताबें पढेंगे या फिर थोड़ी बहुत रिसर्च करेंगे और अगर आपको संगीत बहुत पसंद है तो उनके संगीत के बारे में भी ज्यादा से ज्यादा रिसर्च कर लेंगे और जितना ज्ञान बटोरना चाहेंगे बटोर संकेंगे। पर क्या पंचम को रोज जी सकेंगे?

जी हाँ, यहाँ बात पंचम दा के ऐसे ही कुछ दीवाने प्रशंसको की हो रही है जो विरले ही मिलते हैं। वो पंचम दा के सिर्फ दीवाने ही नहीं है बल्क़ि वो अपनी रोज की दिनचर्या में पंचम को जीते भी हैं। पंचम दा उनके रोज के जीवन का हिस्सा है और वो विरले दीवाने उन्हें आज भी, सिर्फ अपनी यादोँ में ही नहीं रोज के ख्यालों में भी जिन्दा रखते हैं।

इंदौर के नवीन खंडेलवाल जी पेशे से C.A. हैं लेकिन मन और भाव से पंचम दा के एक बहुत बड़े प्रशंसक, दीवाने या यूँ कहें कि भक्त हैं। किसी बड़ी हस्ती का कोई फैन कितना जानेगा उस हस्ती के बारे में ये अंदाजा लगाया जा सकता है लेकिन नवीन खंडेलवाल जी के पास जो खजाना है पंचम दा का, उसे देख कर अंदाजा लगाना भी मुश्किल है कि उनके पास पंचम से जुड़ा कौन सा गीत, संगीत या जानकारी नहीं होगी। जीते जागते विकिपीडिया हैं नवीन खंडेलवाल जी, पंचम दा के।

अपने C.A. के इतने व्यस्त जीवन में भी वो रोज पंचम दा को एक प्रकार से जीते हैं और उन्होंने अपने जीवन के हर पल में पंचम दा को एक ऐसी जगह दी है जिसे बयां करना मुश्किल है। रोज का एक घंटा जरुर वो पंचम दा के लिए देते ही हैं, फिर कितना भी काम क्यों ना हो। पंचम दा को लेकर उनके ज्ञान सागर की गहराई को मापना थोड़ा मुश्किल है। उनके पास पंचम से जुडी हर बारीक चीज़, जो वो जमा कर पाए बहुत ही संभाल कर रखी है, पंचम दा के हर गाने की एक एक धुन, उस धुन की बारीकियों का रिकार्ड और कौन सा संगीत कब दिया उसके पीछे क्या कारण रहा ये सब भी उनकी सहेजी यादों का हिस्सा है।

जब नवीन जी से पंचम दा के बारे में जानने जाओ तो वो बस, मौखिक ही ना जाने कितनी अनजानी बातें बता देते हैं जो उनके पास हैं। इन्होनें पंचम दा के प्रति अपने प्यार को किताबों के ज़रिये भी जाहिर किया है, इनकी लिखी किताबों को पढ़ कर इनकी दीवानगी का पता चलता है। पंचम दा के जीवन को इन्होनें ताश के पत्तों पर भी बड़े ही कलात्मक ढंग से उकेरा है जो देखने और पढ़ने में बड़े ही दिलचस्प हैं। नवीन जी के कंप्यूटर के डेस्कटॉप पर पंचम दा की तस्वीर है और उसके अन्दर ना जाने कितनी धुनें और गीत, जिन्हें बड़ा सहेज कर रखा गया है और ऑफिस में इनका जो केबिन है वो पूरा पंचम दा के रंग में ही रंगा है।

उनसे हुई बातचीत में उन्होंने पंचम दा से जुड़े कई किस्से बताए और हँसते हुए ये भी कहा कि “मैं तो कहाँ C.A. बन गया मैं तो संगीत के लिए बना था” और अब वो अपना यह सपना, पंचम दा की यादों में C.A. का इतना बड़ा पद संभालते हुए भी बख़ूबी जी रहे हैं।

उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश देखें इस वीडियो-

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here