लेखक चेतन भगत ने ऐसे जाहिर की नाराजगी “पटाखों पर बैन” के फैसले के बाद

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दिवाली भले ही पटाखों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन इस बार दिल्लीवासियों को ये दिवाली बिना पटाखों के ही मनानी पड़ेगी। जी हां, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली एनसीआर में पटाखों की ब्रिकी पर रोक लगा दी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मशहूर लेखक चेतन भगत कुछ खफा दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अपनी नाराजगी ट्विटर पर जाहिर की है। भगत ने ट्वीट किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली में पटाखे बेचने पर रोक लगा दी है। पूरी तरह से रोक। पटाखों के बिना बच्चों की कैसी दिवाली। पटाखे नहीं, तो दिवाली नहीं। ये कैसा फैसला है जो हिन्दूओं को उनका त्योहार भी ठीक से मनाने नहीं दे रहा।

कोर्ट के इस फैसले से उनका गुस्सा सांतवे आसमान पर है। वे यही नहीं रूके बल्कि उन्होंने कहा कि हमेशा हिन्दुओं के त्योहार को लेकर ही क्यों ऐसे फैसले सुनाए जाते हैं। कभी मुसलमानों के मुहर्रम या ईद पर बकरों का खून बहाने पर इस तरह की रोक क्यों नहीं लगती। उन्होंने अपने तीसरे ट्वीट में लिखा है कि आज अपने ही देश ने अपने बच्चों के हाथ से फुलझड़ी भी छीन ली।

आगे उन्होंने लिखा है कि जो लोग दिवाली पर पटाखों पर रोक लगाने के लिए मेहनत कर रहे हैं, मैं इसी उत्साह के साथ दूसरे त्योहारों को भी रिफॉर्म होते हुए देखना चाहता हूं। खासतौर से उन त्याहारों में जिनमें खून और कूट-कूट के हिंसा भरी हुई है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ये दलील दी है कि कम से कम एक दिवाली को पटाखों से मुक्त मनाकर देखिए।

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